महाराष्ट्र के बीड जिले के सांगांव गांव में एक महिला वकील के साथ हुई दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। अत्यधिक ध्वनि की शिकायत करने पर महिला को ना सिर्फ बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना का भी शिकार बनाया गया।

पीड़िता, ज्ञानेश्वरी अंजन, का कहना है कि गांव में मंदिर के लाउडस्पीकर और आसपास की आटा चक्कियों के तेज शोर ने उनकी तबीयत बिगाड़ दी थी। माइग्रेन से जूझ रही वकील ने प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन राहत मिलने के बजाय उन्हें डरावने अंजाम का सामना करना पड़ा।
आरोपी खुलेआम घूमते रहे
घटना 16 मार्च की है, जब कुछ लोगों ने महिला के घर में घुसकर बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि गांव के सरपंच और उनके साथी अचानक उनके घर पहुंचे और हाथ में लाठी, लोहे की रॉड लेकर उन पर टूट पड़े। इस वारदात में महिला बुरी तरह घायल हो गईं। हमले के वक्त उनके पिता घर पर नहीं थे, जिसका फायदा उठाकर हमलावरों ने उन्हें अकेले पाकर निशाना बनाया।
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साक्ष्य मिटाने की कोशिश
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने न केवल उन पर हमला किया बल्कि उनका मोबाइल फोन भी जबरदस्ती छीन लिया, ताकि न तो वो किसी से मदद मांग सकें और न ही कोई सबूत इकट्ठा कर सकें। इसके बाद उन्होंने उन्हें धमकाते हुए चेताया कि अगर दोबारा कोई शिकायत की गई, तो जान से मार देंगे।
पीछा कर डराया, पुलिस बनी मूकदर्शक
घटना के बाद भी महिला को चैन नहीं मिला। उन्होंने बताया कि कुछ आरोपी लगातार उनका पीछा करते रहे, जिससे उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा है। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
कानून के रखवालों की चुप्पी ने खड़े किए कई सवाल
पीड़िता का दावा है कि उन्होंने कई बार FIR दर्ज कराने और सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने न तो उनकी बात सुनी और न ही हमलावरों पर कोई कार्रवाई की। आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़िता न्याय के इंतजार में अकेली लड़ाई लड़ रही हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है, लेकिन गांव में बढ़ती दहशत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कानून की रक्षा करने वाली व्यवस्था, वकीलों को भी सुरक्षा नहीं दे सकती?
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