भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़े। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। छात्रों का कहना है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गई है, तो मध्यप्रदेश में भी उन्हें उचित स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन
इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पतालों में लंबे समय तक सेवाएं देनी पड़ती हैं। इसके बावजूद मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और मौजूदा खर्चों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। छात्रों ने सरकार से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी करने और उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टरों से जुड़ी है।
CM हाउस की ओर बढ़े तो पुलिस ने रोका
अपनी मांगों को सरकार तक सीधे पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारी पीछे हटे। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
‘UP में बढ़ा स्टाइपेंड तो MP में क्यों नहीं?’
प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश सरकार से सवाल किया। उनका कहना है कि जब यूपी में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जा सकती है, तो मध्यप्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। छात्रों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा स्टाइपेंड में काम करना मुश्किल हो रहा है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला ले और स्टाइपेंड को बढ़ाकर दूसरे राज्यों के स्तर के अनुरूप करे। प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है। अब इस मामले में सरकार की ओर से किसी निर्णय या बातचीत की पहल का इंतजार है।


