भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। यदि राजधानी में हाईकोर्ट की बेंच शुरू होती है, तो भोपाल समेत आसपास के करीब 10 जिलों के लोगों को न्यायिक मामलों के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत मिल सकती है। फिलहाल हाईकोर्ट से जुड़े कई मामलों के लिए लोगों और वकीलों को जबलपुर तक जाना पड़ता है। इससे समय के साथ यात्रा और ठहरने का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ता है। भोपाल में बेंच की मांग को इसी परेशानी से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच बनने से राजधानी के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
हर तारीख पर लंबा सफर और बढ़ता खर्च
हाईकोर्ट में चलने वाले मामलों में एक से अधिक तारीखें लगने की स्थिति में पक्षकारों और वकीलों को बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। ऐसे में यात्रा का खर्च, समय और अन्य व्यवस्थाएं आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती हैं। भोपाल में हाईकोर्ट बेंच होने से आसपास के जिलों के लोगों के लिए अदालत तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे विशेष रूप से उन पक्षकारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अपने मामलों की सुनवाई के लिए बार-बार अदालत पहुंचना पड़ता है। बेंच की मांग को लेकर सामने आई चर्चा में भी समय और खर्च की बचत को प्रमुख मुद्दा बताया गया है।
10 जिलों को मिल सकता है सीधा फायदा
भोपाल मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्र में स्थित होने के कारण आसपास के कई जिलों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक और परिवहन केंद्र है। भोपाल संभाग में वर्तमान में भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा जिले शामिल हैं। ऐसे में राजधानी में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने पर आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए न्यायिक सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय वकीलों के लिए भी न्यायिक कामकाज के नए अवसर और सुविधाएं बढ़ सकती हैं।
न्याय तक पहुंच आसान होने की उम्मीद
भोपाल में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का सबसे बड़ा संभावित फायदा न्याय तक पहुंच को आसान बनाना होगा। लोगों को दूर स्थित मुख्य हाईकोर्ट तक जाने के बजाय राजधानी में ही कई मामलों की सुनवाई की सुविधा मिल सकती है। इससे समय और आर्थिक बोझ दोनों कम होने की उम्मीद है। हालांकि बेंच की स्थापना के लिए जरूरी प्रशासनिक, कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया पूरी होना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मांग और संभावनाओं के बीच लोगों की नजर आगे होने वाले फैसलों पर है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो भोपाल और आसपास के जिलों के हजारों पक्षकारों तथा अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।


