spot_img
होमBhopal ( M.P )भोपाल में जैव-चिकित्सीय कचरे पर NGT सख्त, नगर निगम को अलग संग्रहण...

भोपाल में जैव-चिकित्सीय कचरे पर NGT सख्त, नगर निगम को अलग संग्रहण के निर्देश

भोपाल में जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखना जरूरी है। जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट का गलत तरीके से संग्रहण या निपटान संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का कारण बन सकता है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन की निगरानी करता है।

सामान्य कचरे से अलग करना होगा मेडिकल वेस्ट

जैव-चिकित्सीय कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में एकत्र करने की व्यवस्था है। इसे घरेलू या अन्य ठोस कचरे के साथ मिलाने की अनुमति नहीं है। अलग किए गए कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट एंड डिस्पोजल फैसिलिटी तक पहुंचाया जाता है। नगर निगम और स्वास्थ्य संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संग्रहण के दौरान संक्रमित सामग्री सामान्य कचरे में न मिले। इससे सफाई कर्मचारियों, कचरा उठाने वालों और आम लोगों के संपर्क में संक्रमण फैलने का जोखिम कम किया जा सकता है।

परिवहन के दौरान होगी निगरानी

जैव-चिकित्सीय कचरे के परिवहन को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश हैं। कचरे को पूरी तरह ढके और निर्धारित वाहनों में ही उपचार केंद्र तक पहुंचाया जाना चाहिए। वाहनों में GPS की व्यवस्था के जरिए उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि कचरा कहां से उठाया गया और निर्धारित सुविधा तक कब पहुंचा। NGT से संबंधित निर्देशों में जैव-चिकित्सीय कचरे के परिवहन के दौरान जिम्मेदार व्यक्ति की निगरानी और वाहनों की रियल टाइम GPS ट्रैकिंग पर भी जोर दिया गया है।

लापरवाही से स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा

जैव-चिकित्सीय कचरे को खुले में छोड़ने या सामान्य कचरे के साथ मिलाने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं। इस्तेमाल की गई सिरिंज, दस्ताने, पट्टियां और अन्य संक्रमित सामग्री के संपर्क में आने से सफाई कर्मचारियों और आसपास के लोगों को खतरा हो सकता है। इसके अलावा गलत तरीके से निपटान किए जाने पर मिट्टी और जल स्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की व्यवस्था में जैव-चिकित्सीय कचरा ले जाने वाले वाहनों की ट्रैकिंग की सुविधा भी शामिल है। ऐसे में भोपाल में अलग संग्रहण, सुरक्षित परिवहन और नियमित निगरानी के जरिए नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

Sanjay
Author: Sanjay

हमारे 'आप भी बने पत्रकार' अभियान से जुड़ें और आज ही नागरिक पत्रकार बनें! अपनी कहानियाँ और विचार Bhagya Vidhata के साथ साझा करें और अपनी खबरें हमारी पत्रिका और ऑनलाइन वेबसाइट में प्रकाशित होते देखें। आपकी खबर भेजने के लिए यहाँ क्लिक करे!

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

WhatsApp पर जुड़े

ताज़ा और एक्सक्लूसिव हॉट अपडेट्स के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप में शामिल हों!

यह खबरें भी पढ़ें

लोकल खबरे