मध्यप्रदेश में शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर भोपाल में आंदोलन जारी है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिक्षक राजधानी पहुंचे हैं। नीलम पार्क में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के दौरान शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं और जल्द निर्णय लेने की मांग की। आंदोलन के दौरान शिक्षक नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। एक शिक्षक नेता ने कहा कि कर्मचारी का इतिहास मंगल पांडे बनने का रहा है।
TET की अनिवार्यता खत्म करने की प्रमुख मांग
शिक्षक संगठनों की पहली प्रमुख मांग लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता खत्म करने की है। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरने से छूट दी जानी चाहिए। शिक्षक नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार से कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। संगठन चाहते हैं कि राज्य सरकार विधानसभा के माध्यम से इस मामले में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे, ताकि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत का रास्ता निकले।
पहली नियुक्ति से सेवा अवधि और वरिष्ठता की मांग
आंदोलन की दूसरी प्रमुख मांग शिक्षकों की सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से करने की है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, नियुक्ति के बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं और संवर्गों में हुए बदलावों के कारण शिक्षकों की वास्तविक सेवा अवधि का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। संगठनों का कहना है कि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना होने पर पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मामलों में शिक्षकों को लाभ मिल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की जा रही है।
ई-अटेंडेंस को स्वैच्छिक करने और आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
तीसरी मांग शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक करने की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि दूरदराज के स्कूलों, नेटवर्क की समस्या और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे अनिवार्य रखने के बजाय स्वैच्छिक किया जाना चाहिए। धरने के दौरान शिक्षक नेताओं ने कहा कि तीनों मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की है। आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।


