राजधानी में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब कुछ विधायक ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और विधायकों के बीच तीखी बहस और झूमाझटकी भी देखने को मिली। मामला ‘नारी शक्ति वंदन’ विषय पर चर्चा से जुड़ा था। विधानसभा के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कई तीखे बयान दिए।
ट्रैक्टर के साथ विधानसभा पहुंचे विधायक
विधानसभा सत्र के दौरान कुछ विधायक ट्रैक्टर लेकर परिसर की ओर बढ़े। उनका कहना था कि वे किसानों और आम जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ट्रैक्टर को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी दौरान विधायक और पुलिसकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई और कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
‘नारी शक्ति वंदन’ पर हुई तीखी बहस
विधानसभा के अंदर और बाहर ‘नारी शक्ति वंदन’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज रही। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर भी काम दिखना चाहिए। बहस के दौरान कई नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि महिलाओं के लिए बनाई गई योजनाओं का असली लाभ कितनी महिलाओं तक पहुंच रहा है।
कांग्रेस विधायक का बयान बना चर्चा का विषय
इस पूरे मामले में एक कांग्रेस विधायक का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि सरकार बंगाल में “शेरनी” से जीत नहीं पा रही है, इसलिए ऐसे बिल लाकर राजनीति की जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। सत्तापक्ष के नेताओं ने इस बयान पर आपत्ति जताई और इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। वहीं विपक्षी नेताओं ने अपने साथी विधायक का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपनी राजनीतिक राय रखी है।
विधानसभा के बाहर बढ़ी राजनीतिक हलचल
घटना के बाद विधानसभा परिसर के बाहर काफी देर तक राजनीतिक हलचल बनी रही। मीडिया और आम लोगों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी रही। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज हो सकती है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि विधानसभा सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव किस तरह सड़क तक पहुंच जाता है। अब सभी की नजर सरकार और विपक्ष के अगले कदम पर बनी हुई है।


