भोपाल। राजधानी भोपाल में गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी को लेकर उपभोक्ताओं से कथित तौर पर 236 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आया है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिकायतों के मुताबिक, कुछ गैस एजेंसियों पर ई-केवाईसी के नाम पर राशि लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत यह सुविधा मुफ्त है, तो इसके लिए पैसे वसूलना उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
गैस कनेक्शन से जुड़ी ई-केवाईसी का उद्देश्य उपभोक्ता की पहचान और कनेक्शन से संबंधित जानकारी का सत्यापन करना है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सी प्रक्रिया निशुल्क है और किन सेवाओं के लिए नियमानुसार शुल्क लिया जा सकता है। किसी भी भुगतान से पहले उसकी रसीद और शुल्क का स्पष्ट विवरण मांगना महत्वपूर्ण है।
फ्री ई-केवाईसी के नाम पर 236 रुपये लेने का आरोप
भोपाल में कुछ गैस एजेंसियों पर ई-केवाईसी के नाम पर 236 रुपये वसूलने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में उपभोक्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि यदि ई-केवाईसी मुफ्त है, तो उनसे राशि क्यों ली जा रही है। हालांकि, सभी गैस एजेंसियों पर इस तरह की वसूली होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। उपभोक्ताओं को चाहिए कि भुगतान करने से पहले एजेंसी से शुल्क का कारण पूछें और लिखित रसीद लें। इससे किसी भी तरह की अतिरिक्त या गलत वसूली की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने में मदद मिल सकती है।
उपभोक्ता शुल्क की आधिकारिक जानकारी लें
गैस कनेक्शन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए भुगतान करने से पहले संबंधित गैस कंपनी की आधिकारिक जानकारी जांचना जरूरी है। यदि एजेंसी किसी सेवा के लिए शुल्क मांगती है, तो उपभोक्ता उसका विवरण और लागू नियमों की जानकारी मांग सकते हैं। ई-केवाईसी की प्रक्रिया और शुल्क संबंधी नियमों को लेकर भ्रम होने पर संबंधित गैस कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मांगी गई राशि वैध है या नहीं।
शिकायत मिलने पर जांच की जरूरत
यदि उपभोक्ताओं से मुफ्त ई-केवाईसी के नाम पर अनधिकृत राशि वसूली जा रही है, तो मामले की जांच जरूरी है। उपभोक्ता भुगतान की रसीद, संदेश या अन्य उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखकर संबंधित गैस कंपनी के शिकायत केंद्र में शिकायत कर सकते हैं। फिलहाल, 236 रुपये की कथित वसूली को लेकर संबंधित एजेंसियों और गैस कंपनियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति स्पष्ट होगी। उपभोक्ताओं के हित में जरूरी है कि शुल्क संबंधी जानकारी पारदर्शी रखी जाए और किसी भी अनुचित वसूली की शिकायत पर उचित कार्रवाई हो।


