भोपाल की करीब 95 करोड़ रुपये मूल्य की रियाज मंजिल और उससे जुड़ी संपत्तियों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने फिलहाल बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह विवाद कोहेफिजा के खानूगांव क्षेत्र में स्थित लगभग आठ हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है, जिसे शत्रु संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रभावित पक्षों को राहत मिली है। अब मामले में केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी की सुनवाई और अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर लगाई रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बेदखली और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। अदालत ने प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर देने की बात कही। इस आदेश के बाद फिलहाल प्रशासन संपत्ति से बेदखली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकेगा। हालांकि, यह रोक संपत्ति के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला नहीं है।
शत्रु संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में याचिकाकर्ता आजम हसन खान ने संपत्ति से संबंधित बेदखली नोटिसों और 29 अप्रैल 2024 को जारी वेस्टिंग सर्टिफिकेट को चुनौती दी थी। याचिका में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 की धारा 12 के तहत जारी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने अदालत से प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की थी।
केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को शत्रु संपत्ति अधिनियम की धारा 18 के तहत केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। प्राधिकारी को दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करके तर्कसंगत निर्णय लेना होगा। यदि निर्णय याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आता है, तो अदालत के निर्देशानुसार उसे लागू करने से पहले सात दिन का समय दिया जाएगा, ताकि संबंधित पक्ष आगे कानूनी उपाय अपना सकें। रियाज मंजिल का संबंध भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान के परिवार से बताया जाता है। संपत्ति की कानूनी स्थिति और स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद अब सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही आगे बढ़ेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से बेदखली की कार्रवाई रुकी हुई है।


