भोपाल के लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लेकर अब एक बार फिर उम्मीद जगी है। सरकार की ओर से इसे आगे बढ़ाने की सहमति मिलने के बाद शहर में इसके लागू होने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मंजूरी के बाद भी नए मास्टर प्लान को जमीन पर लागू होने में करीब छह महीने का समय लग सकता है। इसके लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया, अधिसूचना और संबंधित विभागों की कार्रवाई पूरी करनी होगी।
मास्टर प्लान लागू होने के बाद भोपाल में जमीन के इस्तेमाल और निर्माण से जुड़े कई नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जहां मिक्स्ड लैंड यूज की अनुमति दी जाएगी। ऐसे इलाकों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नए प्रावधान लागू होंगे। इससे शहर के विकास की दिशा तय होने के साथ जमीन की कीमतों और निर्माण गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
मंजूरी के बाद भी छह महीने तक चलेगी प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार की सहमति के बाद मास्टर प्लान को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। इसे लागू करने से पहले कई औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। संबंधित विभागों के स्तर पर दस्तावेजों की जांच, आवश्यक संशोधन, अधिसूचना और अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे प्रभावी किया जा सकेगा। मास्टर प्लान का उद्देश्य शहर के भविष्य के विकास को व्यवस्थित करना है। इसमें आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक क्षेत्र, परिवहन व्यवस्था, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य विकास गतिविधियों के लिए भूमि उपयोग निर्धारित किया जाता है। नए प्लान के लागू होने से भोपाल के विस्तार और विकास को एक तय दिशा मिलने की उम्मीद है।
मिक्स्ड लैंड यूज में डायवर्सन के लिए देना होगा शुल्क
नए मास्टर प्लान में मिक्स्ड लैंड यूज को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान सामने आ सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एक ही जमीन पर आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए जमीन मालिकों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। भूमि के उपयोग में बदलाव या डायवर्सन की स्थिति में संबंधित शुल्क चुकाना पड़ सकता है।इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो अपनी आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मिक्स्ड लैंड यूज से बाजार, कार्यालय, दुकान और अन्य सुविधाएं लोगों के करीब आ सकती हैं, लेकिन इसके लिए शुल्क और नियामकीय प्रक्रिया को समझना जरूरी होगा। मास्टर प्लान लागू होने के बाद भोपाल के कई इलाकों में विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। वहीं, जमीन मालिकों और बिल्डरों को नए नियमों के अनुसार ही निर्माण और भूमि उपयोग की योजना बनानी होगी।


