जंगलों के बीच सड़क निर्माण से वन्यजीवों पर बढ़ेगा दबाव
भोपाल। राजधानी भोपाल और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर वन्यजीवों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ सकती है। 60 मीटर चौड़ी सड़कों के जंगलों से होकर गुजरने की योजना ने बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सड़कें परिवहन और विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन यदि उनका निर्माण वन क्षेत्रों और वन्यजीवों के आवागमन वाले रास्तों को प्रभावित करता है, तो इसका असर जैव विविधता पर पड़ सकता है।
जंगलों में रहने वाले बाघों को भोजन, पानी, प्रजनन और सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। ऐसे में जंगल के बीच से गुजरने वाली चौड़ी सड़कें उनके प्राकृतिक आवास को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकती हैं। हालांकि, वास्तविक खतरे का आकलन सड़क के सटीक मार्ग, वन क्षेत्र की स्थिति और वन्यजीवों की आवाजाही से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।
बाघों के कॉरिडोर और प्राकृतिक आवास पर चिंता
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बाघों के कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ये रास्ते बाघों को एक वन क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक जाने में मदद करते हैं। यदि सड़क निर्माण के कारण इन मार्गों पर बाधा आती है, तो बाघों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे उनके अलग-अलग समूहों के बीच संपर्क कम होने और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है। सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही से वन्यजीवों के दुर्घटनाग्रस्त होने का जोखिम भी रहता है। निर्माण कार्य के दौरान मशीनों का शोर, पेड़ों की कटाई और मानवीय गतिविधियां जानवरों के व्यवहार तथा उनके रहने के स्थानों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी परियोजना में पर्यावरणीय प्रभाव का गंभीरता से मूल्यांकन जरूरी है।
विकास के साथ वन्यजीव संरक्षण की चुनौती
सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी, वन भूमि से जुड़े नियमों और वन्यजीव संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं का पालन महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सलाह से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास या अन्य उपयुक्त संरचनाओं और गति नियंत्रण जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है। विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए सड़क का मार्ग तय करते समय जंगलों और बाघों के प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता से देखना होगा। प्रस्तावित सड़कों का वास्तविक मार्ग, प्रभावित वन क्षेत्र और बाघों की आवाजाही से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही खतरे की गंभीरता स्पष्ट हो सकेगी।


