भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 में प्रस्तावित करीब 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर शहर के पर्यावरण और हरियाली पर चिंता बढ़ गई है। प्रस्तावित सड़कों की चौड़ाई 18 मीटर से लेकर 75 मीटर तक रखी गई है। विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों पर असर पड़ सकता है। उपलब्ध आकलन के अनुसार, 791.42 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर एनएचएआई की संदर्भ दर 365 पेड़ प्रति किलोमीटर मानने पर करीब 2.89 लाख पेड़ों पर संभावित असर का सांकेतिक अनुमान सामने आता है। यह आंकड़ा वास्तविक कटाई की अंतिम संख्या नहीं है।
791 किमी सड़क नेटवर्क में अलग-अलग चौड़ाई के मार्ग
मास्टर प्लान में भोपाल के भविष्य के विस्तार और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कई नए मार्ग और चौड़े कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 18 मीटर चौड़ी 111 सड़कें, 24 मीटर चौड़ी 103 सड़कें और 30 मीटर चौड़ी 48 सड़कें प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 45 मीटर, 60 मीटर और उससे अधिक चौड़ाई वाले मार्गों का भी प्रावधान है। इन सड़कों का उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ना और बढ़ते यातायात को सुगम बनाना है।
सड़क मार्किंग में ओवरलैपिंग पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
मैनिट के आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में ओवरलैपिंग को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ स्थानों पर पहले से 10 या 15 मीटर चौड़े प्रस्तावित मार्गों के साथ अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर सड़क का प्रस्तावित गलियारा काफी ज्यादा चौड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में सड़क की वास्तविक सीमा और भूमि के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
विकास के साथ भोपाल की हरियाली बचाने की चुनौती
पर्यावरणविदों ने बड़ी संख्या में पेड़ों पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भोपाल की पहचान उसकी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण से जुड़ी है, इसलिए सड़क विकास की योजना बनाते समय पेड़ों और मौजूदा वनस्पति को बचाने पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शहरी नियोजन विशेषज्ञों के मुताबिक वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़क के अंतिम रेखांकन, भूमि अधिग्रहण और मौके पर मौजूद पेड़ों की स्थिति के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना मास्टर प्लान-2047 के सामने एक बड़ी चुनौती है।


