भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई के बीच अब सरकार के नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को आगे बढ़ाने की संभावना पर नजर है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। मंगलवार को आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में सुनवाई के लिए नगर निगम ने 34 पेज का नया एफिडेविट पेश किया है। निगम के अनुसार शहर में 62,500 से अधिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया गया है और 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए हैं।
सीलिंग कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुई। निगम ने शहर के अलग-अलग जोन में नोटिस जारी किए और कई प्रतिष्ठानों को बंद कराया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। इससे व्यापारियों और रहवासियों के बीच भी अलग-अलग मत सामने आए हैं। नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई का विवरण और अनुपालन से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई है। इससे पहले सीलिंग कार्रवाई के दौरान कई व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मास्टर प्लान लागू करने और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की थी। दूसरी ओर कुछ रहवासियों ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को जरूरी बताया है।
सरकार ने तैयार किया मास्टर प्लान का खाका
भोपाल का मौजूदा मास्टर प्लान वर्ष 1995 में लागू हुआ था और इसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2010 में मास्टर प्लान-2021 का प्रारूप तैयार किया गया था, लेकिन वह अंतिम रूप से लागू नहीं हो सका। अब सरकार ने नए मास्टर प्लान की दिशा में तैयारी शुरू की है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने शहर के विस्तार, बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से जुड़े बदलावों को ध्यान में रखते हुए नए मास्टर प्लान की आवश्यकता का पक्ष तैयार किया है। यदि न्यायालय से आगे बढ़ने की स्थिति बनती है, तो सरकार ड्राफ्ट जारी कर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां ले सकती है।
रहवासियों और कारोबारियों की नजर कोर्ट के फैसले पर
सीलिंग विवाद के बीच रहवासी और कारोबारी दोनों ही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं। व्यापारी संगठन मास्टर प्लान, मिश्रित भू-उपयोग और नियमितीकरण जैसे विकल्पों की मांग करते रहे हैं, जबकि रहवासियों की ओर से आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के तर्कों के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं सरकार की ओर से प्रस्तावित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होने पर शहर के विकास, भूमि उपयोग और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियमों पर भी तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल सभी पक्ष न्यायालय के निर्देश और सरकार की अगली प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।


