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भोपाल में बढ़ते डेंगू के मामले: हृदय संबंधी जटिलताओं का बढ़ा खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क रहने की दी सलाह

शहर में लगातार बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले

भोपाल में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अस्पतालों में बुखार और डेंगू के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीजों में समय पर इलाज से स्थिति नियंत्रित हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, त्वचा पर चकत्ते या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

गंभीर मामलों में हृदय पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, डेंगू केवल प्लेटलेट्स कम होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गंभीर मामलों में यह हृदय पर भी प्रभाव डाल सकता है। कुछ मरीजों में हृदय की मांसपेशियों में सूजन (मायोकार्डाइटिस), अनियमित धड़कन (अरिद्मिया) या रक्तचाप में गंभीर गिरावट जैसी जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, ऐसी जटिलताएं अपेक्षाकृत कम मामलों में होती हैं, लेकिन यदि समय पर पहचान और उपचार न मिले तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

समय पर जांच और उपचार से जोखिम कम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू की पुष्टि होने पर चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित जांच, पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना बेहद जरूरी है। मरीजों को स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक के परामर्श का पालन करना चाहिए। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना आवश्यक है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं और जटिलताओं का जोखिम काफी कम हो जाता है।

बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की है। पानी की टंकियों को ढककर रखना, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलना, पूरी बांह के कपड़े पहनना और मच्छररोधी उपाय अपनाना संक्रमण से बचाव में सहायक हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि डेंगू की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी भी आवश्यक है। समय पर जागरूकता, स्वच्छता और सतर्कता अपनाकर डेंगू के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

Sanjay
Author: Sanjay

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