भोपाल में आवारा कुत्तों के हमलों के मामले लगातार चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, शहर में हर दिन औसतन 81 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में इस समस्या से निपटने के लिए करीब साढ़े 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद घटनाओं में कमी नहीं आ पाई है। बढ़ते मामलों ने नगर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नागरिकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
हर दिन सामने आ रहे डॉग बाइट के मामले
शहर के विभिन्न इलाकों से रोजाना डॉग बाइट की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना रहता है। सुबह और रात के समय यह समस्या और अधिक गंभीर महसूस होती है।
करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी समस्या बरकरार
जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद डॉग बाइट की घटनाएं कम नहीं हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नियमित निगरानी, बेहतर योजना और जनजागरूकता की भी आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विभाग पर बढ़ा दबाव
डॉग बाइट के बढ़ते मामलों से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी दबाव बढ़ा है। एंटी-रेबीज वैक्सीन और उपचार की मांग लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि डॉग बाइट को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि समय पर उपचार न मिलने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को सावधानी बरतने और घटना होने पर तुरंत इलाज कराने की सलाह दी जा रही है।
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति की जरूरत है। आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण, नियमित टीकाकरण और कचरा प्रबंधन जैसे कदमों पर गंभीरता से काम करना होगा। भोपाल जैसे बड़े शहर में सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से मजबूत और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। लोगों को आशा है कि भविष्य में इस समस्या पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकेगा।


