राहगीरों ने सड़क पार करते देखा बाघ, इलाके में बढ़ी सतर्कता
भोपाल के कलियासोत डैम के आसपास उस समय हलचल मच गई, जब राहगीरों ने एक बाघ को सड़क पार करते हुए देखा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघ कुछ देर तक सड़क के किनारे दिखाई दिया और फिर शांतिपूर्वक जंगल की ओर चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई और लोगों से अनावश्यक रूप से जंगल की ओर न जाने की अपील की गई। बाघ के दिखने की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और आसपास से गुजरने वाले यात्रियों में उत्सुकता के साथ-साथ सतर्कता भी बढ़ गई।
विशेषज्ञों ने बताया– यह बाघ का प्राकृतिक क्षेत्र
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कलियासोत डैम और उससे लगे वन क्षेत्र बाघों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही के मार्ग का हिस्सा हैं। ऐसे क्षेत्रों में समय-समय पर बाघ या अन्य वन्यजीवों का दिखाई देना असामान्य नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के बीच मौजूद प्राकृतिक कॉरिडोर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए यदि किसी बाघ के देखे जाने की सूचना मिलती है, तो घबराने के बजाय वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना अधिक उचित होता है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, लोगों से की अपील
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने इलाके का निरीक्षण किया और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी वन्यजीव के दिखने की जानकारी मिले तो स्वयं उसके पास जाने या फोटो और वीडियो बनाने की कोशिश न करें। इसके बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें। विभाग ने यह भी कहा कि जंगल से लगे क्षेत्रों में वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें और अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने या वन्यजीवों को परेशान करने से बचें।
मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों के कारण कई बार वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों के निकट दिखाई देते हैं। ऐसे मामलों में वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने या उन्हें उकसाने के बजाय उनके प्राकृतिक व्यवहार का सम्मान करना आवश्यक है। नागरिकों की सतर्कता, वन विभाग की सक्रिय निगरानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। कलियासोत डैम के पास बाघ का दिखाई देना इस बात का संकेत भी है कि क्षेत्र का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र अब भी वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, जिसकी सुरक्षा और संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है।


