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भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज के बाद अब सख्ती, PWD के नए इंजीनियरों के लिए ट्रेनिंग और परीक्षा अनिवार्य

भोपाल में बने 90 डिग्री के ओवरब्रिज और इंदौर के उलझे डिज़ाइन वाले पुलों को लेकर हुई आलोचना के बाद मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अब कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने नए इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कोर्स और परीक्षा अनिवार्य कर दी है। इस कोर्स को पास किए बिना अब किसी भी नए इंजीनियर को फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।

क्या है नया नियम?

MPPWD द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार:

  • नए इंजीनियरों को सड़कों, पुलों और फ्लाईओवर के निर्माण व मरम्मत की सही तकनीकों पर आधारित एक विशेष कोर्स करना होगा।
  • कोर्स पूरा करने के बाद आंतरिक परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • केवल वही इंजीनियर जिन्हें यह परीक्षा पास होगी, उन्हें फील्ड पर तैनाती दी जाएगी।

क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

MPPWD हाल के दिनों में ग़लत डिज़ाइन और घटिया निर्माण को लेकर आलोचनाओं में रहा है:

  •  भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज की 90 डिग्री की मोड़ ने सोशल मीडिया और जनता में व्यंग्य और नाराज़गी पैदा की।
  •  इसके बाद इंदौर में दो राइट एंगल टर्न वाला ओवरब्रिज भी चर्चा में आ गया।
  •  मामले के बाद दो मुख्य अभियंताओं सहित आधा दर्जन से अधिक इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया।

PWD मंत्री ने इन डिजाइनों का बचाव करते हुए कहा था कि यह PWD मैनुअल के अनुसार बनाए गए हैं, जिसमें एक मोड़ 114 डिग्री का भी है।

गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

भोपाल समेत कई शहरों में बरसात की पहली बारिश में ही सड़कें टूट गईं, जगह-जगह गड्ढे नजर आने लगे।

PWD मंत्री के बयान ने आग में घी डालने का काम किया जब उन्होंने कहा:

  • जब तक सड़कें रहेंगी, तब तक गड्ढे भी रहेंगे। दुनिया में कहीं ऐसी तकनीक नहीं है जिससे गड्ढे न हों।

अब सीखना होगा IRC मैनुअल

PWD के एक मुख्य अभियंता ने बताया कि

  • इंडियन रोड काउंसिल (IRC) मैनुअल में निर्माण और मरम्मत से जुड़ी सभी बातें विस्तार से बताई गई हैं, लेकिन नए इंजीनियर उसे गंभीरता से नहीं पढ़ते। इसलिए यह कोर्स और परीक्षा अनिवार्य की गई है ताकि वे इसे ठीक से समझें और लागू करें।

फायदा क्या होगा?

  • इंजीनियरिंग की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • डिज़ाइन में त्रुटियाँ और निर्माण खामियां कम होंगी।
  • जनता को बेहतर और सुरक्षित सड़कों की सुविधा मिलेगी।
  • विभाग की छवि में सुधार होगा।

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