भोपाल। बदलती जीवनशैली, धूप में कम समय बिताना और असंतुलित खानपान के कारण बच्चों में विटामिन-डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में लगभग 50 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-डी की कमी पाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल हड्डियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की शारीरिक वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकती है। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों में दिखाई देने वाले शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच व उपचार कराएं।
विटामिन-डी की कमी क्यों बढ़ रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल अधिकांश बच्चे घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं और मोबाइल, टीवी या अन्य डिजिटल उपकरणों में व्यस्त रहते हैं। इसके कारण उन्हें पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, जबकि शरीर में विटामिन-डी बनने के लिए सूर्य की रोशनी सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा फास्ट फूड का बढ़ता चलन और पोषणयुक्त आहार की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। नियमित शारीरिक गतिविधियों में कमी भी बच्चों के समग्र स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
इन 6 लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चे में बार-बार थकान महसूस होना, हड्डियों या पैरों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बार-बार बीमार पड़ना, दांतों का कमजोर होना या शारीरिक विकास की गति धीमी होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह विटामिन-डी की कमी का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। सही स्थिति का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराना जरूरी है।
समय पर जांच और संतुलित आहार है जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को संतुलित भोजन के साथ विटामिन-डी और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ देना चाहिए। दूध, दही, अंडे, मछली और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। यदि डॉक्टर आवश्यक समझें, तो जांच के बाद उचित मात्रा में विटामिन-डी सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं। विशेषज्ञ बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वयं दवा या सप्लीमेंट शुरू करने की सलाह नहीं देते।
धूप, पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच से मिलेगी सुरक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को रोजाना कुछ समय सुबह की धूप में खेलने या शारीरिक गतिविधियां करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके साथ ही संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने से विटामिन-डी की कमी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि अभिभावक शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें और समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लें, तो बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है। जागरूकता और समय पर देखभाल ही इस समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।


