विधानसभा परिसर में एक महिला के लाल साड़ी पहनकर वीडियो बनाने का मामला सामने आने के बाद फर्जी IAS अधिकारी बनने का मामला चर्चा में है। सामने आई जानकारी के मुताबिक महिला ने खुद को अधिकारी बताकर लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी। वह अपनी सहेली के साथ विधानसभा पहुंची और वहां वीडियो भी बनाया। इस दौरान दोनों के बीच हुई बातचीत में महिला कथित तौर पर कहती सुनाई दीकि कोई उन्हें अधिकारी नहीं मानेगा। महिला की सहेली ने भी उसे सीनियर बताया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं।
लाल साड़ी में विधानसभा पहुंचकर बनाया वीडियो
जानकारी के अनुसार महिला लाल साड़ी पहनकर विधानसभा परिसर पहुंची थी। वहां उसने वीडियो बनाया, जो बाद में सामने आया। वीडियो में महिला का व्यवहार और बातचीत चर्चा का विषय बन गई। बताया जा रहा है कि वीडियो बनाते समय वह खुद को अधिकारी के तौर पर प्रस्तुत कर रही थी। विधानसभा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण परिसर में उसकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि महिला परिसर में किस तरह दाखिल हुई और उसके पास प्रवेश से संबंधित कोई अनुमति या पहचान पत्र था या नहीं।
बातचीत में बोली- ‘कोई नहीं मानेगा ऑफिसर्स हैं’
वीडियो में महिला कथित तौर पर अपनी सहेली से बातचीत करते हुए कहती है कि कोई उन्हें अधिकारी नहीं मानेगा। बातचीत के दौरान वह खुद को ऑफिसर बताने की कोशिश करती दिखाई देती है। इसी दौरान उसकी सहेली उसे सीनियर बताती है। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि महिला ने कहीं सरकारी अधिकारी होने का दावा करके किसी व्यक्ति को गुमराह तो नहीं किया। पुलिस वीडियो में मौजूद बातचीत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई
मामला सामने आने के बाद पुलिस महिला की पहचान, उसके दावों और विधानसभा में पहुंचने के तरीके की जांच कर रही है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला ने खुद को IAS अधिकारी बताने का दावा क्यों किया और क्या उसने इस पहचान का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए भी किया था। जांच में उसके सोशल मीडिया अकाउंट, वीडियो और संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले में सामने आए तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि महिला ने किस उद्देश्य से अधिकारी होने का दावा किया और विधानसभा परिसर में वीडियो बनाने के पीछे उसकी वास्तविक मंशा क्या थी।


