भोपाल में यतीमखाने से जुड़ी करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। जमीन के स्वामित्व और इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच लंबे समय से खींचतान की स्थिति बनी हुई है। इसी मामले में वक्फ से जुड़ी शिकायत और एफआईआर के बाद अस्पताल की गतिविधियों को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में ताला लगाने के साथ पानी की आपूर्ति रोकने की कोशिश की गई, जिससे वहां रह रहे बच्चों और मरीजों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। मामले में 98 बच्चों के लिए पानी का संकट पैदा होने का दावा किया जा रहा है। विवाद के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
2.7 एकड़ जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
मामला यतीमखाने की उस जमीन से जुड़ा है, जिसका क्षेत्रफल करीब 2.7 एकड़ बताया जा रहा है। जमीन के इस्तेमाल और अधिकार को लेकर विवाद सामने आने के बाद मामला कानूनी स्तर तक पहुंच गया। वक्फ से जुड़े पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। इसके बाद अस्पताल परिसर में कार्रवाई किए जाने के आरोप लगाए गए। संबंधित पक्षों के बीच जमीन के दस्तावेज और अधिकार को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।
अस्पताल पर ताला और पानी रोकने का आरोप
विवाद के बीच अस्पताल प्रबंधन की ओर से आरोप लगाया गया कि परिसर पर ताला लगाने और पानी की आपूर्ति बाधित करने जैसी कार्रवाई की गई। अस्पताल में मरीजों के साथ कर्मचारी और अन्य लोग भी मौजूद रहते हैं, ऐसे में पानी की सुविधा प्रभावित होने से परेशानी बढ़ गई। अस्पताल पक्ष का कहना है कि किसी भी विवाद का असर मरीजों और जरूरतमंद लोगों की सुविधाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से लगाए गए दावों और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति की जांच होना बाकी है। प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर आवश्यक सुविधाएं बहाल रखने की मांग की जा रही है।
98 बच्चों के सामने जलसंकट का दावा
विवाद का सबसे गंभीर पहलू यतीमखाने में रह रहे 98 बच्चों से जुड़ा बताया जा रहा है। पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से बच्चों के सामने दैनिक जरूरतों को पूरा करने की समस्या खड़ी होने का दावा किया गया है। स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चिंता जताई जा रही है कि जमीन या संपत्ति का विवाद अपनी जगह है, लेकिन इसका असर बच्चों की बुनियादी सुविधाओं पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासन के सामने अब जमीन से जुड़े कानूनी विवाद के साथ बच्चों और अस्पताल में मौजूद लोगों की आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने की चुनौती है। फिलहाल मामले में एफआईआर, जमीन के दस्तावेज और लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।


