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भोपाल में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क का खुलासा: 75 आरोपी जांच के घेरे में, 19 फरार पर इनाम घोषित

भोपाल में बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराने के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मध्यप्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में अब तक 75 आरोपियों को चिह्नित किया गया है। इनमें बांग्लादेशी नागरिकों के अलावा फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पते और गवाह उपलब्ध कराने वाले लोग तथा कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। 19 आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। STF ने इनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

70 फर्जी पासपोर्ट की जांच, भोपाल से मिले सबसे ज्यादा मामले

जांच एजेंसी के अनुसार करीब 70 संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट की पड़ताल की जा रही है। इनमें भोपाल के अन्नानगर क्षेत्र से जुड़े करीब 40 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा डबरा से 17, बैतूल के आमला क्षेत्र से 11 और छिंदवाड़ा-पांढुर्णा से दो पासपोर्ट के मामले सामने आए हैं। जांच में कुछ पासपोर्ट के लिए बौद्ध मठों और अन्य स्थानों के पतों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। STF यह पता लगाने में जुटी है कि अलग-अलग लोगों के नाम और पते का इस्तेमाल किस तरह किया गया और पासपोर्ट आवेदन की सत्यापन प्रक्रिया में ये दस्तावेज कैसे आगे बढ़े। जांच का दायरा अब मध्यप्रदेश से बाहर भी बढ़ाया गया है और फरार आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

50 पासपोर्ट में तीन लोगों की गवाही की जांच

जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी यह सामने आई है कि करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से लगभग 50 पासपोर्ट में तीन लोगों—गया प्रसाद गौतम, गुलाब राय गौतम और रियाल चौधरी उर्फ भंते मैतानंद—की गवाही या सत्यापन का इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसी इनके मोबाइल नंबर और दस्तावेजों में दर्ज पतों की भी पड़ताल कर रही है। STF ने इस मामले में गया प्रसाद गौतम को भी गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार उस पर डबरा से जारी 17 पासपोर्ट के लिए कथित तौर पर आवासीय सत्यापन और गवाह के तौर पर भूमिका निभाने का आरोप है। मामले में सामने आए सभी आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होनी है।

मनी ट्रेल से लेकर पासपोर्ट अधिकारियों की भूमिका तक जांच

STF अब कथित नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार एक बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन और रकम के हस्तांतरण की जानकारी सामने आई है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में पैसा किन लोगों तक पहुंचा। इसके साथ ही पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। STF दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। फरार आरोपियों की तलाश और पूछताछ के बाद मामले में और नाम सामने आने की संभावना है।

Sanjay
Author: Sanjay

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