spot_img
होमBhopal ( M.P )भोपाल बना इंडियन स्किमर का नया ठिकाना: कैमरों में कैद हुए चूजे,...

भोपाल बना इंडियन स्किमर का नया ठिकाना: कैमरों में कैद हुए चूजे, शहर में पहली बार दिखा प्रजनन का संकेत

भोपाल की झीलों और जलक्षेत्रों में पक्षियों की विविधता के बीच इंडियन स्किमर की मौजूदगी ने वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। शहर में इंडियन स्किमर के चूजे कैमरों में कैद किए गए हैं, जिससे यहां इस संकटग्रस्त पक्षी के प्रजनन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। इंडियन स्किमर यानी पनचीरा अपनी अनोखी चोंच और पानी की सतह को छूते हुए उड़कर मछली पकड़ने की शैली के लिए पहचाना जाता है। इसे IUCN की रेड लिस्ट में Endangered श्रेणी में रखा गया है।

भोपाल में पहली बार चूजों की मौजूदगी ने बढ़ाई उम्मीद

इंडियन स्किमर सामान्य तौर पर बड़ी नदियों, रेतीले टापुओं और उथले जलक्षेत्रों के आसपास प्रजनन करता है। मध्यप्रदेश में तवा जलाशय इस प्रजाति के लिए एक महत्वपूर्ण नया प्रजनन स्थल बनकर सामने आया है। 2026 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के तवा जलाशय में स्किमर के प्रजनन की पुष्टि हुई थी और वहां कई पक्षियों को देखा गया। अब भोपाल में चूजों का कैमरे में रिकॉर्ड होना पक्षी विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण अवलोकन माना जा रहा है। चूजों की मौजूदगी इस बात का संकेत हो सकती है कि शहर के किसी जलक्षेत्र में इन पक्षियों को भोजन और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिल रही हैं।

पानी की सतह पर उड़कर मछली पकड़ता है इंडियन स्किमर

इंडियन स्किमर की सबसे खास पहचान उसकी अनोखी चोंच है। इसकी ऊपरी चोंच की तुलना में निचली चोंच अधिक लंबी होती है। यह पक्षी पानी की सतह के बेहद करीब उड़ते हुए अपनी निचली चोंच को पानी में डालकर मछलियों और अन्य जलीय जीवों को पकड़ता है। इसी विशेष व्यवहार के कारण इसे ‘स्किमर’ नाम मिला है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह पक्षी मुख्य रूप से बड़े रेतीले नदी तटों और कम गहराई वाले जलक्षेत्रों से जुड़ा है। प्रजनन के दौरान रेत के टापू और सुरक्षित घोंसले इसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां, जल प्रवाह में बदलाव और शिकारी जानवर इनके अंडों और चूजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

संरक्षण के लिए सुरक्षित जलक्षेत्र जरूरी

इंडियन स्किमर की वैश्विक आबादी में गिरावट के पीछे नदी क्षेत्रों में बदलाव, बांधों के कारण जल प्रवाह में परिवर्तन, आवास का नुकसान और घोंसलों पर बढ़ते खतरे प्रमुख कारणों में शामिल हैं। BNHS के अनुसार यह प्रजाति अब मुख्य रूप से भारत में प्रजनन करती है और इसकी संख्या सीमित है। भोपाल में चूजों की मौजूदगी सामने आने के बाद शहर के जलक्षेत्रों में इन पक्षियों की निगरानी और उनके संभावित प्रजनन स्थलों की सुरक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि यहां इंडियन स्किमर नियमित रूप से प्रजनन करता पाया जाता है, तो यह भोपाल की जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होगा। साथ ही, पक्षियों के आवास को सुरक्षित रखने के लिए जलक्षेत्रों के आसपास मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करना और नियमित निगरानी करना उपयोगी साबित हो सकता है।

Sanjay
Author: Sanjay

हमारे 'आप भी बने पत्रकार' अभियान से जुड़ें और आज ही नागरिक पत्रकार बनें! अपनी कहानियाँ और विचार Bhagya Vidhata के साथ साझा करें और अपनी खबरें हमारी पत्रिका और ऑनलाइन वेबसाइट में प्रकाशित होते देखें। आपकी खबर भेजने के लिए यहाँ क्लिक करे!

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

WhatsApp पर जुड़े

ताज़ा और एक्सक्लूसिव हॉट अपडेट्स के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप में शामिल हों!

यह खबरें भी पढ़ें

लोकल खबरे