भोपाल जिले के परवलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही सामने आई। जिला पंचायत उपाध्यक्ष स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां बच्चे तो मौजूद मिले, लेकिन कोई शिक्षक नजर नहीं आया। स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ था। इस स्थिति को देखकर निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई। सरकारी स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाती है, लेकिन इस घटना ने जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल में बच्चे मौजूद, शिक्षक नहीं मिले
निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में बच्चे मौजूद थे, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक वहां नहीं थे। बच्चों की मौजूदगी के बावजूद शिक्षकों का अनुपस्थित रहना गंभीर मामला माना जा रहा है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षक की नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी होती है। निरीक्षण के दौरान स्कूल की स्थिति देखकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किए जाने की संभावना है। स्कूल में शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ सकती है।
मुख्य गेट पर लटका था ताला
जिला पंचायत उपाध्यक्ष जब परवलिया प्राथमिक विद्यालय पहुंचे तो स्कूल के गेट पर ताला लगा मिला। निरीक्षण के दौरान स्कूल बंद मिलने से वहां की व्यवस्थाओं पर कई सवाल उठे। यदि स्कूल समय पर खुलता नहीं है या शिक्षक निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ता है। निरीक्षण के दौरान स्कूल से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। अधिकारियों की ओर से स्कूल की स्थिति और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान शिक्षक का अनुपस्थित मिलना और स्कूल के गेट पर ताला लगा होना गंभीर लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और जिम्मेदारों से जवाब लेने की बात कही। अब शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शिक्षक स्कूल में क्यों मौजूद नहीं थे और गेट पर ताला किस कारण लगा था। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में नियमित निरीक्षण और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।


