Rupee All Time Low: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 84.75 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट आर्थिक और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। 2014 से पहले, भारतीय जनता पार्टी ने रुपये की गिरावट को लेकर तत्कालीन सरकार पर तीखे हमले किए थे। वहीं, आज इसी स्थिति को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया जा रहा है। हलाकि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के पुराने वीडियो फिर से चर्चा में हैं, जहां उन्होंने रुपये की गिरावट को सरकार की विफलता से जोड़ा था।

अमेरिकी नीतियों का वैश्विक असर:
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद टैक्स कटौती और नियमन में ढील के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेज़ी आने की संभावना बढ़ी है। इसके चलते डॉलर की मांग बढ़ रही है, जिससे अन्य वैश्विक मुद्राओं, विशेषकर यूरो और एशियाई मुद्राओं, पर दबाव बढ़ा है। भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा।
इसके अलावा रुपये की गिरावट का एक प्रमुख कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय बाजारों से धन निकालना है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है, जिससे रुपया और अधिक दबाव में आ सकता है।
रुपये की गिरती कीमत और बढ़ते टैक्स ने आर्थिक नीति और राजनीतिक बयानों में अंतर को उजागर किया है। यह स्थिति व्यापक बहस का विषय बन गई है, जहां आर्थिक आंकड़ों के बीच राजनीतिक दृष्टिकोण भी सवालों के घेरे में है।


