भोपाल के लंबे समय से लंबित नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के प्रकाशन का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश सरकार को भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने साफ किया है कि अंतिम मास्टर प्लान का प्रकाशन और उसका क्रियान्वयन सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा। यह मामला शहर में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई से जुड़े विवाद के बीच सुनवाई में आया।
ड्राफ्ट जारी करने की मिली अनुमति, अंतिम फैसला कोर्ट के पास
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और उसे सार्वजनिक करने की अनुमति दी जाए। इसके बाद अदालत ने ड्राफ्ट के प्रकाशन की अनुमति तो दी, लेकिन अंतिम अधिसूचना और लागू करने की प्रक्रिया को अपनी अनुमति से जोड़ दिया। यानी सरकार अब ड्राफ्ट को प्रकाशित कर सकती है, लोगों से सुझाव और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन अंतिम मास्टर प्लान लागू करने से पहले कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। भोपाल में नया मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शहर के पास 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं है। इसी वजह से नए प्लान को लेकर लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी।
रहवासी क्षेत्रों में सीलिंग कार्रवाई रहेगी जारी
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की अनुमति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी क्षेत्रों में चल रही सीलिंग कार्रवाई को रोकने का कोई आदेश नहीं दिया। आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के मामलों में नगर निगम की कार्रवाई जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने शिकायतें रखी गईं कि कुछ प्रतिष्ठानों को सील किए जाने के बाद वे दोबारा खुल गए। अदालत ने नगर निगम को अपने निर्देशों का पूर्ण पालन करने और कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं करने को कहा। कोर्ट ने भोपाल नगर निगम से अगली सुनवाई में कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
मास्टर प्लान से शहर की भविष्य की तस्वीर तय होगी
नए मास्टर प्लान के लागू होने से भोपाल में जमीन के उपयोग, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों, सड़क नेटवर्क तथा भविष्य के शहरी विकास से जुड़े कई फैसलों को दिशा मिल सकती है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद शहर के नागरिकों, कारोबारियों और अन्य हितधारकों को उसके प्रावधानों को देखने और अपनी आपत्तियां या सुझाव दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम ड्राफ्ट का प्रकाशन है। इसके बाद आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया तथा सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। अंतिम प्लान को लागू करने से पहले अदालत की मंजूरी की शर्त के कारण इसकी अगली प्रक्रिया भी न्यायिक निगरानी में रहेगी।


